वर्षों से उठाइ जा रही आवाज़ और संघर्ष की जीत है।। कैट द्वारा क्विक डिलिवरी प्रतिबंध।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब मुद्दा व्यापारियों और उपभोक्ताओं से जुड़ा हुआ हो, तो कैट की आवाज़ निर्णायक होती है।
10 मिनट की डिलीवरी पर केंद्र सरकार की रोक, 
कैट राष्ट्रीय सचिव सतीश सलूजा (राजू) राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र गांधी , बिलासपुर कैट अध्यक्ष हीरानंद जयसिंह, कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष दिलीप खेंडेलवाल, संजय मित्तल, सुरेंद्र सिंह अजमानी, उपाध्यक्ष प्रमोद वर्मा , प्रवीण सलूजा , अनिल गुप्ता,श्रीकांत पांडे, मंत्री राजेश सैनी, राजेंद्र सिंह, मुकेश लालचंदानी, मनोज लाहोरानी, हरदीप होरा, राकेश भगवानी, विष्णु गुप्ता, अनिल राघवानी, अरविंद वर्मा, सुनील रॉय, सज्जन अग्रवाल , संगठन मंत्री व मीडिया प्रभारी परमजीत उबेजा ने बताया की 
*वर्षों से कैट द्वारा उठाई जा रही चेतावनियों और संघर्ष की जीत* है।

कैट ने संसद में मुद्दा उठाने से लेकर राष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ्रेंस, सरकार को विस्तृत पत्र और लगातार जनहित में चेतावनी—आज लिया गया फैसला उसी सतत प्रयास का परिणाम है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि अत्यधिक तेज डिलीवरी का दबाव डिलिवरी कर्मियों की जान के लिए खतरा है वही स्थानीय व्यापार और पारंपरिक रिटेल व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा रहा था 
*मानवीय, दूरदर्शी फैसला*
बिलासपुर अध्यक्ष हीरानंद जयसिंह ने कहा की केंद्र सरकार का यह निर्णय न केवल मानवीय बल्कि दूरदर्शी और समयोचित है, इससे डिलीवरी कर्मियों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित होगी,स्थानीय व्यापार और पूरे रिटेल इकोसिस्टम की रक्षा होगी ।यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि सुरक्षित, न्यायसंगत और जवाबदेह डिजिटल व्यापार व्यवस्था की दिशा में एक मजबूत शुरुआत है।कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) बिलासपुर ईकाई द्वारा सरकार का आभार व्यक्त करता है और कैट आगे भी जनहित में सुधारों के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।